देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के लिए सड़क कनेक्टिविटी के लिहाज से यह दौर बेहद अहम साबित होने वाला है. एक तरफ, बल्लूपुर से पांवटा साहिब को जोड़ने वाला मार्ग नए सिरे से विकसित किया जा रहा है, जिसका काम लगभग पूरा होने की कगार पर है. दूसरी तरह, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लगभग बनकर तैयार हो चुका है. इन दोनों परियोजनाओं के एक साथ जमीन पर उतरने से देहरादून, ट्रैफिक जाम की पुरानी समस्या से राहत पाएगा. साथ ही राजधानी का संपर्क दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से सीधा और सुगम हो जाएगा।
बल्लूपुर पांवटा साहिब मार्ग शहर के भीतर ट्रैफिक का नया समाधान: देहरादून शहर का बल्लूपुर चौक लंबे समय से ट्रैफिक दबाव का बड़ा केंद्र रहा है. यहां से गुजरने वाले वाहन और स्थानी लोगों की हमेशा से सरकार से मांग रही है कि लोगों को जाम से मुक्ति दिलवाई जाए. साथ ही हिमाचल जाने वाले वाहनों को भी रेंग-रेंगकर चलना पड़ता है. सहारनपुर रोड, जीएमएस रोड और विकासनगर की ओर जाने वाला यातायात यहीं आकर फंसता है. ऐसे में बल्लूपुर से विकासनगर होते हुए पांवटा साहिब तक जाने वाला मार्ग शहर के लिए हमेशा से अहम रहा है. अब बताया जा रहा है कि इस मार्ग को फरवरी तक पूरा किया जा रहा है।
इस सड़क के बनने से देहरादून, विकासनगर, हरबर्टपुर और आसपास के कस्बों को सीधा फायदा मिलेगा. अभी स्थिति यह है कि देहरादून से पांवटा साहिब जाने में ट्रैफिक और सड़कों की हालत के कारण दो से ढाई घंटे तक का समय लग जाता है. कई बार भारी वाहनों और स्थानीय ट्रैफिक के कारण यह सफर और भी लंबा हो जाता है. लेकिन सड़क के चौड़ीकरण और सुधार कार्य पूरे होने के बाद यही दूरी करीब 40 मिनट में देहरादून से सीधे पांवटा साहिब तक तय हो जाएगी।
इस पूरे मार्ग पर हाईटेक कैमरे भी लग गए हैं और भविष्य के हिसाब से मार्ग और पुल तैयार किया गया है. देहरादून-हिमाचल को जोड़ने के लिए एक पुल यमुना नदी पर भी बनाया गया है, जिसकी लागत लगभग 162 करोड़ रुपए है. फिलहाल जल्द ही ये मार्ग आम जनता और सेलाकुई जैसे औद्योगिक क्षेत्र के लिए खुल जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र पांवटा साहिब को मिलेगा सीधा फायदा: पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश का एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है. यहां दवा, सीमेंट, पैकेजिंग और अन्य उद्योग बड़ी संख्या में मौजूद हैं. देहरादून और पांवटा साहिब के बीच बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से औद्योगिक परिवहन को बड़ा फायदा होगा. कच्चा माल और तैयार माल की आवाजाही तेज होने से लागत कम होगी और समय की बचत भी होगी. इसका असर देहरादून के व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी साफ दिखाई देगा।
शहर के अंदरूनी इलाकों को मिलेगी जाम से राहत: बल्लूपुर-पांवटा साहिब मार्ग के सुधरने का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि देहरादून शहर के अंदरूनी इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा. अभी पांवटा साहिब और विकासनगर की ओर जाने वाला ज्यादातर ट्रैफिक सहारनपुर रोड और बल्लूपुर चौक से होकर गुजरता है. नए और बेहतर मार्ग से यह ट्रैफिक आसानी से बाहर निकल सकेगा, जिससे जीएमएस रोड, कांवली रोड और सहारनपुर रोड जैसे इलाकों में जाम की समस्या घटेगी।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से फासला होगा कम: दूसरी बड़ी परियोजना के तौर पर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को देखा जा रहा है. करीब 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को लगभग 13 हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है. यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरेगा और देहरादून के मोहंड क्षेत्र तक पहुंच रहा है. इस एक्सप्रेसवे की सबसे चुनौतीपूर्ण कड़ी गणेशपुर से देहरादून के बीच का करीब 19.5 से 20 किलोमीटर लंबा हिस्सा रहा है, जो घने जंगल और संवेदनशील वन क्षेत्र से होकर गुजरता है. पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यहां करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, ताकि वन्यजीवों की आवाजाही बाधित न हो. इसके साथ ही 50 से ज्यादा वाइल्डलाइफ अंडरपास बनाए गए हैं, जिससे हाथी और अन्य जानवर सुरक्षित रूप से जंगल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जा सके।
समय की बचत: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर, जो अभी साढ़े चार से पांच घंटे तक का होता है, वह घटकर करीब ढाई से तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा. इसका सीधा असर यह होगा कि राजधानी देहरादून तक पहुंचना न केवल आसान होगा, बल्कि समय और ईंधन की खपत भी कम होगी।
दो मार्ग एक फायदा देहरादून: बल्लूपुर-पांवटा साहिब मार्ग और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे मिलकर देहरादून के लिए डबल कनेक्टिविटी मॉडल तैयार करेंगे. एक ओर दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले लंबी दूरी के ट्रैफिक एक्सप्रेसवे के जरिए सीधे देहरादून के बाहरी हिस्सों तक पहुंचेगा. वहीं, दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश और औद्योगिक क्षेत्रों की ओर जाने वाला ट्रैफिक बल्लूपुर पांवटा साहिब मार्ग से सुचारू रूप से निकलेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि देहरादून शहर के भीतर अनावश्यक ट्रैफिक का दबाव कम होगा और स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में राहत मिलेगी।
पर्यटन को मिलेगा नया सहारा: उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और बल्लूपुर पांवटा साहिब मार्ग के बेहतर होने से पर्यटन गतिविधियों को भी सीधा फायदा होगा. दिल्ली और आसपास के शहरों से आने वाले पर्यटक कम समय में देहरादून पहुंच सकेंगे. वहीं, देहरादून से मसूरी, चकराता और विकासनगर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी. पर्यटन से जुड़े होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट और स्थानीय कारोबार को इससे नई उम्मीद मिलेगी।
रियल एस्टेट और रोजगार के अवसर: सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने से देहरादून के आसपास रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी. एक्सप्रेसवे और प्रमुख सड़कों के आसपास नए आवासीय क्षेत्र वेयरहाउस और छोटे औद्योगिक क्लस्टर विकसित हो सकते हैं. इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
आने वाले समय में ट्रैफिक प्लान पर नजर: हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सड़कों के बेहतर होने के साथ-साथ शहर के भीतर ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
हम देहरादून में नए ट्रैफिक रूट प्लान बाईपास और सिग्नल फ्री कॉरिडोर पर भी विचार कर रहे हैं. ताकि, बढ़ते वाहनों का दबाव संतुलित किया जा सके. -अजय सिंह देहरादून एसएसपी
बहरहाल, बल्लूपुर-पांवटा साहिब मार्ग और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देहरादून के लिए केवल सड़क परियोजनाएं नहीं हैं. बल्कि यह राजधानी की आर्थिक सामाजिक और पर्यटन विकास की नई रीढ़ बनकर उभर रही हैं. आने वाले समय में जब ये दोनों मार्ग पूरी क्षमता के साथ आम जनता के लिए खुलेंगे, तब देहरादून को न सिर्फ जाम से राहत मिलेगी, बल्कि राजधानी की रफ्तार भी एक नए स्तर पर पहुंच जाएगी।
