कहते हैं, ‘अगर मेहनत और जज्बा हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता’. ऐसे ही कुछ टिहरी जिले के तीन युवाओं 25 वर्षीय प्रदीप सिंह रावत, 24 वर्षीय मयंक सिंह पडियार और 23 वर्षीय आयुष उनियाल ने कर दिखाया है. प्रदीप और आयुष ने 13 दिसंबर को आईएमए पासिंग आउट परेड पास कर सेना में लेफ्टिनेंट बनकर जिले का नाम रोशन किया है. जबकि मंयक सिंह पडियार ने हैदराबाद में एअर फोर्स अकादमी से फाइटर जेट पायलट बनकर पास आउट हुए. इन तीनों युवाओं की कामयाबी से क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
नगुन पट्टी के विकोल गांव निवासी प्रदीप रावत की प्रारंभिक शिक्षा मैरी माता कॉन्वेंट स्कूल चिन्यालीसौड़ में हुई. जबकि इंटरमीडिएट एफआईआर देहरादून से करने के बाद बीएससी डीबीएस कॉलेज देहरादून से की. इसके बाद एनडीए की परीक्षा क्वालीफाई कर आईएमए देहरादून में प्रशिक्षण के बाद 13 दिसंबर को आईएमए पासिंग आउट परेड पास की. प्रदीप रावत के पिता किशन सिंह रावत कृषक और माता पार्वती देवी गृहिणी हैं. परिवार में तीन भाइयों में प्रदीप रावत सबसे बड़े हैं. बेटे की इस कामयाबी से वे बेहद खुश हैं.
वहीं नगुन पट्टी के डोबन पलूंजा निवासी मयंक पडियार के पिता विजय सिंह पडियार ने बताया कि, मंयक बचपन से ही एयरफोर्स में जाने की इच्छा जता चुके थे. वे स्वयं सेना की 11वीं गढ़वाल राइफल में 17 साल की सेवा करने के बाद हवालदार पद से सेवानिवृत्त हुए है. मयंक की प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय उत्तरकाशी से हुई. उसके बाद उच्च शिक्षा देहरादून के उत्तरांचल यूनिवर्सिटी से की है. उनकी इस उपलब्धि पर वे काफी खुश है.
टिहरी जनपद के प्रतापनगर विकासखंड के ओण पट्टी के पणसूत गांव निवासी आयुष उनियाल भी सेना में अफसर बने. भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से पास आउट होकर सेना में लेफ्टिनेंट बने आयुष उनियाल का चंबा पहुंचने पर पूर्व सैनिक संगठन और स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया. लेफ्टिनेंट आयुष उनियाल की प्रारंभिक शिक्षा चंबा के कार्मल स्कूल में संपन्न हुई. उसके बाद उन्होंने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की. जनवरी 2022 में उनका चयन एनडीए में हुआ और बीते 13 दिसंबर को वे सेवा में लेफ्टिनेंट बनकर पास आउट हुए.
दूसरी तरफ, मजिरकांडा निवासी अजय भट्ट पुत्र सतीष भट्ट सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं. उनकी इस उपलब्धि से उनके गांव में खुशी का माहौल है. अजय ने कक्षा आठ तक की पढ़ाई पिथौरागढ़ के पीएनएफ स्कूल से की. इंटर तक की शिक्षा उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय आठगांव शिलिंग से ली. वह विद्यालय में टॉपर भी रहे. स्नातक की शिक्षा उन्होंने रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की. इसके बाद उनका चयन सीडीएस में हुआ. 18 माह के प्रशिक्षण के बाद 13 दिसंबर को आईएमए देहरादून से वह पासआउट होकर सेना में अधिकारी बन गए हैं. अजय के पिता उत्तराखंड पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं. जबकि मां गृहिणी हैं. उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता को दिया है.
